कोरोना वायरस: हमेशा के लिए बदलेगी लोगों की आदतें..??

By Ashvi Verma

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में इमरजेंसी के हालात पैदा कर दिए हैं भारत समेत दुनिया भर की सरकारें इस वायरस से जंग लड़ने के लिए मुमकिन कदम उठा रही हैं

कोरोना वायरस की वजह से कारोबार ठप पड़ गए हैं कई देशों में अंतरराष्ट्रीय यात्राएं रद्द कर दी गई हैं होटल रेस्टो या तो बंद कर दिए गए हैं या फिर लोग उनमें जाने से बच रहे हैं कई कंपनियां खासकर आईटी सेक्टर की कंपनियों ने लोगों को वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की सुविधा दे रही हैं.

जिन पर वायरस से पीड़ित होने का शक है उन्हें बाकी लोगों से अलग-थलग रखा जा रहा है

भारत में पहले से चल रही आर्थिक सुस्ती के दौर में कोरोना की दस्तक ने अर्थव्यवस्था को और मुश्किल में डाल दिया है इससे आने वाले वक्त में लोगों के आवाजाही,खाने-पीने, घूमने फिरने, सामाजिक मेलजोल, और कामकाज संबंधी व्यवहार और आदतों में भी बदलाव आने की संभावना है

साथ ही कंपनी के लिए और अर्थव्यवस्था के दूसरे सेक्टरों के लिए भी बहुत सारी चीजें बदलने वाली है और हो सकता है कि यह बदलाव बाद में स्थाई रूप ले ले.

क्या वर्क- फ्रॉम- होम से स्थाई व्यवस्था बनने वाली है..??

अभी तक इंफॉर्मेशन टेकनोलॉजी (आईटी) सेक्टर को छोड़कर बाकी सेक्टरों में वर्क फ्रॉम होम यानी घर पर काम करने की इजाजत मिलना तकरीबन नामुमकिन था कंपनियां दफ्तर से काम करने को तरजीह दे रही थी.

पहले जिन सेक्टरों में वर्क फ्रॉम होम नहीं था उनमें भी अब इसके लिए दरवाजे खोल रहे हैं मसलन सेल्स वाले रोल्स में भी वर्क फ्रॉम होम मिलने लगा है सेल के लोगों को कहा जा रहा है कि वह क्लाइंट के साथ वर्चुअल मीटिंग करें.

फ्यूचर में जरूरत पड़ी तो फ्लोक्सीबिलिटी होगी हालांकि मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में अभी यह मुश्किल है

कुछ कंपनियों के बारे में मैंने जानकारी पता कि वो बताती है लोगों के रिक्रूटमेंट के वक्त हम कोशिश कर रहे हैं उन्हें फार्म कोरियर कर दिया जाए यहां तक कि लैपटॉप वगैरह भी घर ही पहुंचाने के लिए विकल्प तलाशे जा रहे हैं अपनी फर्म में हम अगले हफ्ते तक 100 फीसदी वर्क फ्रॉम होम पर स्विच करने की कोशिश कर रहे हैं और एक बार अगर ऐसा हो जाता है तो वह हमेशा कायम रहता हैं.

हालांकि भारत में ऐसा होने में कुछ दिक्कतें भी हैं

मुझे नहीं लगता भारत इसके लिए तैयार है इंफ्रास्ट्रक्चर और कल्चर तौर पर हम अभी तैयार नहीं हैं हालांकि कुछ कंपनियां टूल्स और टेक्नोलॉजी के लिहाज से बेहतर स्थिति में है लेकिन भारत में ज्यादातर कंपनियां भी यही चाहेंगे कर्मचारी काम करने के लिए दफ्तर आएं

क्या लोगों में आने जाने की आदतों में बदलाव आएगा..??

कोरोना वायरस के फैलने के बाद से लोग भीड़ वाली जगहों पर जाने और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से बच रहे हैं खासतौर पर दिल्ली मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में लोगों को यह चिंता ज्यादा दिखती है

लोगों के बदलाव के संबंध में या फिर पॉलिसी लेवल पर जो भी बदलाव आए वह पूरी तरह से रिसर्च पर आधारित होनी चाहिए

भारत की आबादी ज्यादा है ऐसे में लोगों को फिर से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल शुरु करना होगा लेकिन रेलवे मेट्रो और बसों जैसे साधनों को चलाने वालों को साफ सफाई पर कहीं ज्यादा फोकस करना होगा

ट्रांसपोर्ट के संबंध में भी हमें सस्टेनेबल कंजमप्शन पैटर्न पर फोकस करना होगा हमारे कंजम्पशन पैटर्न का सीधा असर हमारे ट्रांसपोर्ट पर पड़ता है

हमारे ज्यादा खपत करने की आदत से हमारे अर्बन टिप्स और यात्रा करने की संख्या भी बढ़ जाती है फिलहाल पूरी दुनिया में ट्रेवल पर पाबंदी लगी हुई है इन पाबंदियों के बावजूद हमारा काम चल रहा है हमें कम लंबे ट्रिप्स कि आदत डालनी चाहिए लेकिन ऐसा तभी होगा जब इसके लिए रूल्स और रेगुलेशन लाए जाएंगे.

क्या ऑनलाइन होगी पढ़ाई..??

दुनिया भर में स्कूल और यूनिवर्सिटीज इस बात की कोशिश में है की पढ़ाई के तरीकों को बदला जाए और वर्चुअल क्लासेस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है

तमाम स्कूल कॉलेज भी इस तरह की संभावनाएं खंगाल रहे हैं ऐसे में फ्यूचर में छात्रों को क्लास रूम की बजाय वर्चुअल क्लासेस से जोड़ने की आदत डालनी पड़ सकती है.

धन्यवाद।।

Published by Ashvi Verma

My self Ashvi Verma i have experience to write a blog but decide to write a blog and express to my feeling to all so if you like my feeling then like share and subscribe me and read my all blog which is a real stories

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