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— Oscar Wilde.
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पवित्र हिन्दू तीर्थ हरकी पैड़ी पर बीती अर्द्ध रात्रि में अचानक आकाशीय बिजली गिरने से हरकी पैड़ी का एक बड़ा भाग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
सोम और मंगलवार की अर्द्धरात्रि को हरिद्वार में हुई भारी से भी भारी बारिश से शहर का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया, रात्रि लगभग ढाई बजे शुरू हुई तेज बारिश के दौरान ही हरकी पैड़ी गंगा सभा कार्यालय के उपरी भाग में सडक मार्ग की तरफ से बनी सैकड़ों वर्ष पुरानी, सडक और हरकी पैड़ी को विभाजित करने वाली दिवार वाच टावर सहित हरकी पैड़ी घाट पर गिर गई।

देर रात और तेज बारिश के बीच घटना स्थल पर किसी इंसान की मौजूदगी न होने से हादसे का रुख विकरालता लेने से बच गया।
एक दिन पूर्व ही सोमवती अमावस्या स्नान पर लाकडाउन के कारण वहां लोग नहीं थे अन्यथा श्रद्धालु स्नानार्थी मौसम के असामान्य होने के बावजूद हरकी पैड़ी पर बने रहते हैं।
विद्वान पंडितों के अनुसार गंगा जी हुई नाराज इसलिए प्रकृति ने अपना कहर बरपाया
प्रख्यात ज्योतिषी प्रतीक मिश्रीपुरी ने घटना को लेकर गहरा दुख जताते हुए कहा हरकी पैड़ी के युगों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है,इसे गंगा मईया की नाराज़गी में दर्ज किया जाना चाहिए, प्रशासन ने कल सोमवती अमावस पर श्रद्धालुओं को हरकी पैड़ी पर प्रवेश नहीं करने दिया,न सम्वत पर,न श्रावण मास में,न बैसाखी पर गंगा पूजन करने से लोगों को वंचित रखा,
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गंगा को अपने स्वार्थ और अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए पवित्र गंगा को स्केप चैनल का दर्जा दे दिया,अब भले ही माफी मांगी हो लेकिन गंगा के सम्मान को ठेस पहुंचाने का जो अंजाम उन्हें भुगतना पड़ा कहीं ऐसा ही अंजाम प्रशासन को भी न भुगतना पडे।

आकाशीय बिजली गिरने से एक बड़ा भूभाग हुआ तहस-नहस,
हरकी पैड़ी पर पुरोहित पंडित नितीन शुक्ला ने कहा अर्द्ध रात्रि को धरती पर अचानक कम्पन और तेज आवाज के साथ हरकी पैड़ी का एक भाग क्षतिग्रस्त हो गया जो सबके मस्तिष्क पर चिंता की लकीरें छोड गया है, उन्होंने कहा गंगा सभा कार्यालय पूरी तरह सुरक्षित है और कोई जनहानि भी नहीं हुई है।

धन्यवाद
Report by:- Ashvi Verma

दुनिया का सबसे लम्बा सड़क मार्ग था कलकत्ता से लंदन और इस मार्ग पर बस भी चलती थी.
दिनांक 15 April 1957 को शुरू हुई थी और आखरी बार 1973 में चली और किराया शुरू हुआ था 85 pound से मतलब करीब 7889/-होते थे और जब बंद हुई तब तक किराया 145 Pound 13144/- हो चुका था
बस का मार्ग था कलकत्ता से बनारस, इलाहाबाद, आगरा, दिल्ली से होते हुए लाहोर, रावलपिंडी, काबुल कंधार, तहरान, इस्तांबुल से बुलगेरिया, युगोसलाविया, वीएना से वेस्ट जर्मनी और बेलजियम से होते हुए 20300 miles का सफ़र करते हुए ११ देश (उस समय) पार करते हुए तीन महीने में लंदन पहुँच जाती थी
बस में सारी सुविधाएँ थी जैसे किताबें, रेडीयो, पंखे, हीटर और खाने पीने की व्यवस्था
हैं न मज़ेदार जानकारी !!!
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए हफ्ते में 2 दिन यानी शनिवार और रविवार को पूर्ण लॉकडाउन करने का फैसला किया गया है

राज्य सरकार द्वारा यह फैसला राज्य में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए किया गया है उत्तर प्रदेश में खासकर मेरठ मंडल के 6 जिलों में कोरोना संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है जिसको लेकर उत्तर प्रदेश की सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के द्वारा हफ्ते में 2 दिन लॉकडाउन करने का फैसला किया गया है
राज्य सरकार द्वारा हफ्ते में 2 दिन पूर्ण लॉकडाउन को लेकर मेरठ के व्यापारियों में एक भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है अब व्यापारी को यह नहीं पता कि जो 5 दिन बाजार खुलेगा वह दोनों साइड खोलेंगे या फिर एक साइड ही बाजार खुलेगा जिस प्रकार खुलता आ रहा है..??
हालांकि बाजार कैसे और किस प्रकार खुलेगा इसका फैसला मेरठ प्रशासन के द्वारा लिया गया है और आगे भी ही मेरठ प्रशासन ही इस पर फैसला करेगा लेकिन व्यापारी अभी भ्रम की स्थिति में हैं और आला अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि स्थिति को समझा और परखा जा सके.
मैं अश्वी वर्मा ( न्यूज़ रिपोर्टर न्यूज़ एसीबी 7) ने इस भ्रम की स्थिति को लेकर मेरठ के एडीएम सिटी से फोन पर बात की और व्यापारियों की भ्रम की स्थिति से अवगत कराया उन्होंने व्यापारियों की समस्याओं को समझ कर उस पर जल्द ही विचार करके फैसला लेने का निर्णय किया है और जल्द ही इसके लिए भी एक आदेश जारी करने के लिए कहा है
एडीएम सिटी ने हमें बताया कि आज शाम को राज्य सरकार के द्वारा 2 दिन का लॉक डाउन लगाया गया है उसका अध्ययन करके बाजार के खोलने को लेकर फैसला किया जाएगा प्रशासन द्वारा जो भी फैसला लिया जाएगा उसमें व्यापारियों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर ही फैसला लिया जाएगा
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटियों के लिए उत्तर प्रदेश कन्या सुमंगल योजना की शुरुआत की गई है इस योजना के तहत बेटियों के जन्म से लेकर उनकी स्नातक पढ़ाई तक सरकार आर्थिक मदद करती है सरकार इन बेटियों को अलग-अलग चरणों में कुल ₹15000 उपलब्ध कराती है

उत्तर प्रदेश कन्या सुमंगल योजना के लाभ,
इस योजना के तहत गरीब बेटियों की पढ़ाई का खर्च सरकार वहन करती है
इसमें जन्म के समय ₹2000
1 वर्ष के टीकाकरण पूर्ण करने पर ₹1000
कक्षा 1 में प्रवेश के समय ₹2000
कक्षा 6 में प्रवेश के समय ₹2000
कक्षा 9 में प्रवेश के समय ₹3000
10वीं या 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण करने पर डिग्री या 2 वर्षीय अधिक के डिप्लोमा कोर्स के प्रवेश लेने पर ₹5000 एक मुफ्त प्रदान किए जाएंगे
इस योजना की कुछ शर्तें.
इस योजना के तहत परिवार की वार्षिक आय अधिकतम 3 लाख या उससे कम होनी चाहिए
एक परिवार की अधिकतम दो बालिकाओं को इस योजना के लाभ मिलेगा
एक महिला अपनी दूसरी डिलीवरी के समय जुड़वा बच्चों को जन्म देती है तो तीसरी लड़की भी योजना के लिए योग्य होगी
आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थाई निवासी होना चाहिए


आजकल एक वीडियो बहुत ही वायरल हो रहा है जो मेरठ का वीडियो है उसमें दिखाया गया है की मेरठ की गंगा नदी में डॉल्फिन अठगंगा नदी में अठखेलियां करती डॉल्फिनखेलियां करती नजर आ रही हैं
लॉक डाउन के चलते पूरे विश्व में प्रकृति के अलग-अलग नजारे देखने को मिल रहे हैं आजकल हवा पानी सब कुछ साफ हो गया है ऐसे लग रहा है कि जैसे प्रकृति को एक नया जीवन मिल गया हो
काफी वर्षों से वातावरण को साफ करने के लिए दुनिया भर की सरकारें हजारों लाखों डॉलर खर्च कर चुके हैं लेकिन फिर भी उनको रिजल्ट नहीं मिला
आज अगर रिजल्ट मिला है तो वह भी बिना पैसे खर्च किए हम यह भी देख रहे हैं की प्रकृति का जो हाल हुआ है वह हम मानव ने किया है हमने ही प्रकृति को नष्ट किया है
आज हमारे पास एक मौका है कि हम फिर से अपनी प्रकृति को संभाले और उसको साफ सुथरा रखें

आपको बता दें डॉल्फिन मीठे और साफ पानी में पाई जाती है और आजकल डॉल्फिन गंगा में अठखेलियां करती हुई नजर आ रही है क्योंकि हरिद्वार से लेकर इलाहाबाद तक गंगा काफी हद तक साफ हो चुकी है भारत सरकार पैसा खर्च करके गंगा को साफ नहीं कर पाई और बिना पैसा खर्च किए ही गंगा साफ हो गई गंगा का पानी इस समय पीने लायक हो गया है इसलिए भी आजकल गंगा में डॉल्फिन दिखाई दे रही है
गंगा नदी में गोते लगाती दिखी डॉल्फिन
मेरठ डीएफओ अदिति शर्मा ने कहा है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि लॉक डाउन की वजह से मेरठ में गंगा का पानी साफ हुआ है क्योंकि डॉल्फिन पिछले काफी सालों से यहां पर रह रही है और उनके बच्चे भी देखे गए हैं इन दिनों डॉल्फिन को गंगा का पानी कितना भाड़ा है इसका कोई वैज्ञानिक अध्याय हमारे पास नहीं है हमारे यहां पर गैजेटेड डॉल्फिन पाई जाती है जो गहरे और बहते साफ पानी में पाई जाती हैं लॉक डाउन की वजह से गंगा का पानी कितना साफ हुआ है वन विभाग के पास का कोई डाटा नहीं है
तूने कहा है कि डॉल्फिन की संख्या यहां 35 से ज्यादा है और इससे भी ज्यादा हो सकती है लोग गाउन की वजह से गंगा का पानी साफ हुआ होगा जैसा कि हरिद्वार में बताया जा रहा है लेकिन डॉल्फिन काफी सालों से मेरठ की गंगा में रहती हैं जो वीडियो वायरल हो रहा है वह 1 साल पुराना है यहां पर एक आईएएस अधिकारी थे आकाशदीप बघवान जो अंडर ट्रेनी थे उन्होंने इस वीडियो को शूट किया था।
मीठे और साफ फनी पाई जाती है डॉल्फिन
ज्यादातर डॉल्फिन भारत बांग्लादेश और नेपाल की गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों में पाई जाती हैं भारत में डॉल्फिन को नेशनल एक्वाटिक एनिमल के रूप में मान्यता मिली है वहीं इसे लुप्त प्रजाति भी माना जाता है लेकिन इस तरह से गंगा नदी में डॉल्फिन के गोते लगाता हुआ वीडियो देखकर सोशल मीडिया पर लोग तरह तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं

कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति उत्तर प्रदेश में लगातार भयावह होने की जिम्मेदारी तबलीगी जमात के लोग सुधरने को जरा भी तैयार नहीं है। कुरांटाइन के दौरान मेडिकल स्टाफ से अभद्रता करने वाले जमाती पॉजिटिव होने के बाद भी अस्पताल से भाग रहे हैं आप तो तय होने लगा है कि यह समाज को भी संक्रमित करने में लगे हैं

देश तथा प्रदेश में लॉक डाउन के बीच बागपत के बाद मेरठ से करो ना वायरस पॉजिटिव आइसोलेशन वार्ड से भागा है।। पुलिस उसकी तलाश में लगी है।मेरठ शहर में जगह जगह पर चेकिंग हो रही है जबकि ग्रामीण क्षेत्र में भी पुलिस इसको लेकर काफी सक्रिय हैं। मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज से मंगलवार को एक कोरो ना पॉजिटिव जमाती तमाम सुरक्षा के बीच भी पहली मंजिल से कूदकर भाग गया है।पहले दो संक्रमित जमाती यों के भागने की सूचना थी लेकिन एक वही मिल गया मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती जमाती सुबह बेड पर बिछी चादर का सहारा लेकर पहली मंजिल की खिड़की से कूद गया अप पुलिस छानबीन कर रही है उसका नाम शाकिब है
क्रोना वायरस पॉजिटिव जमाती के वार्ड के भागने की सूचना पर मेरठ पुलिस में खलबली मच गई।इसके बाद शहर में हर क्षेत्र के साथ ग्रामीण इलाकों में भी तलाश तेज कर दी गई है एसपी क्राइम भी तलाशी के अभियान में लगे हैं

धन्यवाद
Aashvi Verma
आशवी वर्मा
31 मार्च 2020

कोरोना वायरस के बढ़ते मरीजों की संख्या से चिंतित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने नोएडा का दौरा किया था जहां पर जिला प्रशासन के कार्यों से असंतुष्ट होने पर गौतमबुध नगर के डीएम को हटा दिया गया और आला अधिकारी से ज्यादा सक्रिय होकर कार्य करने के लिए कहा गया

मेरठ गाजियाबाद और आगरा का दौरा
उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिसको लेकर प्रदेश सरकार काफी चिंतित है कोरोना वायरस के लिए प्रदेश सरकार तरह-तरह के प्रयोग भी कर रही है और प्रशासन से अपील कर रही है कि वह लोगों के हित के लिए कार्य करें और जल्द ही इस महामारी पर काबू पाने का प्रयास करें।।

कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या उत्तर प्रदेश में भी बढ़ रही है जिन शहरों में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है उनमें नोएडा मेरठ लखनऊ आगरा शीर्ष पर चल रहे हैं इसलिए मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी इन शहरों का दौरा कर रहे हैं और प्रशासन से पल-पल की जानकारियां ले रहे हैं मुख्यमंत्री नहीं चाहते कि इन शहरों में जरा सी भी चूक हो और यह वायरस ज्यादा लोगों में फैले

मुख्यमंत्री जी के द्वारा मेरठ और आगरा का दौरा किया गया रद्द।।
31 मार्च 2020 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी 3 जिले जिनमें मेरठ गाजियाबाद और आगरा शामिल है का दौरा करने के लिए निकले मुख्यमंत्री जी गाजियाबाद पहुंचे ही थे तभी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से आला अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कि 12-13 मार्च को दिल्ली के निजामुद्दीन में मर्कस में बहुत सारे लोग इकट्ठा हुए किसी धार्मिक कार्यक्रम के लिए उनमें से 101 लोगों ने यूपी का भी दौरा किया था

वह सभी लोग दुनिया के अलग-अलग देशों से आए हुए हैं उसको देखते हुए योगी सरकार को एक्शन लेना था इसलिए उनको जल्दी लखनऊ आने के लिए बोला गया और मुख्यमंत्री जी गाजियाबाद से ही वापस चले गए गाजियाबाद के बाद उनका मेरठ में कार्यक्रम था और मेरठ के बाद आगरा में कार्यक्रम था कोरोना वायरस का मामला इतना संदिग्ध है इसमें मुख्यमंत्री द्वारा समय-समय पर आवश्यक दौरे किए जा रहे हैं और आला अधिकारियों के साथ नीतियां बनाई जा रही है कोना वायरस का असर यूपी में ज्यादा ना दिखाई दे इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले को लेकर गंभीर बनी हुई है।।

बात करते हैं मेरठ की।।
कोरोना वायरस उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जिलों में फैल चुका है लेकिन गौतम बुध नगर मेरठ लखनऊ गाजियाबाद और आगरा में कुछ ज्यादा ही इसके मरीज बढ़ रहे हैं अब हम बात करते हैं मेरठ की जिसमें 30 मार्च तक कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 19 थी जिसकी वजह से मेरठ प्रदेश में दूसरा ऐसा जिला है जहां ज्यादा तेजी से मामले बढ़ रहे हैं इसलिए मुख्यमंत्री ने मेरठ का दौरा करने का फैसला किया था।
धन्यवाद
Ashvi Verma
26 मार्च 2020
कई जगह इस तरीके के दावे किए जा रहे हैं कि गर्मी की मदद से कोरोना वायरस को खत्म किया जा सकता है या फिर तापमान बढ़ने से कोरोना वायरस अपने आप खत्म हो जाएगा

कई लोग यह भी कह रहे हैं कि पानी को गर्म करके पीजिए उससे भी कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा यह भी कह रहे हैं कि गर्म पानी से नहाने से भी वायरस खतम हो जाएगा ।। सोशल मीडिया पर क्या-क्या नहीं कहा जा रहा।
कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि सूरज की रोशनी में रहने से कोरोना वायरस को खत्म किया जा सकता है

कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि आइसक्रीम और ठंडी चीजों से दूर रहकर कोरोना वायरस से बचा जा सकता है

कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि गर्मी बढ़ने पर वायरस खत्म हो जाएगा तो आज मैं आपको बता रही हूं कि गर्मी बढ़ने पर वायरस का क्या असर होगा…??

सबसे पहले मैं आपको यह बताना चाहती हूं कोरोना वायरस कैसे फैलता है

कोरोना वायरस लिक्विड ड्रॉप पिक्स यानी छिकते समय बाहर आने वाली बूंदों से फैलता है अगर कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति छिकते है तो एक व्यक्ति के एक वक्त पर 3000 ड्रॉप पिक्स बाहर आते हैं इन ड्रोपिक्स में कोरोना वायरस करोड़ों की संख्या में प्रोटीन के रूप में होते हैं

इसका मतलब है कि जहां पर वो ड्रोपिक छिकने के बाद जिन चीजों पर वह गिरते हैं और उन चीजों को हमने छू लिया तो उसके द्वारा वह वायरस हमारे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है
अब देखते हैं कि गर्मी से कितना प्रभाव पड़ेगा
कोरोंना वायरस गर्मी बढ़ने या फिर तापमान बढ़ने से नष्ट नहीं होगा हां लेकिन अगर कोई व्यक्ति है छिकता है तो तापमान बढ़ने से या गर्मी बढ़ने से उसके ट्रॉपिक्स जल्दी सूख सकते हैं और कुछ हद तक वायरस को फैलने से बचाया जा सकता है लेकिन पूरी तरह से नहीं
हम जानते हैं कि फ्लू वायरस ज्यादा तापमान में नहीं रह पाता लेकिन हमें यह नहीं पता कि गर्मी का कोरोना वायरस पर क्या असर पड़ता है
तो इसलिए कोरोना वायरस गर्मी में नष्ट होगा या नहीं होगा इसका कोई प्रमाणित सबूत नहीं है तो इसलिए तापमान के भरोसे ना बैठे कि तापमान बढ़ने पर यह नष्ट हो जाएगा या गर्मी बढ़ने पर इसका प्रकोप कम हो जाएगा यह सोचना सही नहीं है
कोरोना वायरस 100 से ज्यादा देशों में फैला है जिसमें ग्रीनलैंड जैसे ठंडे देश भी शामिल हैं और दुबई जैसे गर्म देश भी।।
कोरोना वायरस अगर एक बार हमारे शरीर में घुस गया तो इसको मारने का तरीका अभी तक पता नहीं चला है हमारे शरीर को इससे लड़ना होगा।
हम अगर अपनी बेडशीट को धो कर रखेंगे तो वहां से जरूर इसको हटा सकते हैं लेकिन अगर यह वायरस हमारे शरीर में घुस गया तो इस वायरस को धोकर नहीं निकाला जा सकता।।

इस वायरस का सोशल डिस्टेंसिंग ही एकमात्र उपाय हैं तो आप सभी अपने घरों पर रहे और कोरोना वायरस से लड़ने में सरकार की मदद करें खुद भी सेफ रहें और अपने परिवार को भी सेफ रखें।।
धन्यवाद
Ashvi Verma
25 March 2020
भारत में कोरोना वायरस के लगभग 606 केस सामने आए हैं जिनमें से 10 लोगों की मौत हो चुकी है।
कोरोना वायरस धीरे धीरे देश को अपनी चपेट में ले रहा है।कोरोना वायरस के प्रकोप से देश को बचाने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकार और हेल्थ मिनिस्ट्री हर मुमकिन कदम उठा रहे हैं
इसी के मद्देनजर देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लॉकडाउन कर दिया गया है लोगों की आवाजाही रोकने के लिए दिल्ली समेत कई राज्यों में कर्फ्यू लगाया गया है
सरकार की तरफ से सख्त हिदायत दी गई है यदि कोई लॉकडाउन का उल्लंघन करता है तो पुलिस उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है
कुछ इलाकों में लॉकडाउन के बावजूद लोग बिना किसी मकसद के घरों से बाहर निकल रहे हैं ऐसे में पुलिस को मजबूरन डंडे का सहारा लेना पड़ रहा है
जी हां मैं उसी प्लास्टिक के पाइप जैसे दिखने वाले डंडे की बात कर रही हूं जो देखने में भले ही साधारण लगे लेकिन इस प्लास्टिक के डंडे की कई खासियत है
आज मैं आपको पुलिस के साधारण दिखने वाले प्लास्टिक के डंडे की खूबियां बता रही हूं जिन्हें जानना आपके के लिए जरूरी और रोचक दोनों हैं
1. डंडे का मैट्रियल

भारत के अधिकतर राज्यों में पुलिस जिस प्लास्टिक की लाठी का प्रयोग करती है वह पाली कार्बोनेट से बनी होती है अनुभवी वर्कफोर्स और अल्ट्रा मॉडर्न मैन्युफैक्चरिंग सेटअप द्वारा इसे तैयार किया जाता है
इस पॉलीकार्बोनेट लाठी की क्वालिटी काफी अच्छी होती है और यह जल्दी टूटती भी नहीं है डंडे की लंबाई करीब साढ़े तीन फुट और मोटाई 3 सेंटीमीटर होती है यह कैरी करने और पकड़ने दोनों में कंफर्टेबल होता है
2. डंडे कीमत और प्रयोग

प्लास्टिक के इस डंडे की कीमत वेबसाइट के हिसाब से अलग-अलग है मैंने इसे अमेजॉन पर चेक किया तो यहां ₹1399 में चार डंडे मिल रहे थे यानी एक डंडा साडे ₹350 का हुआ।
जब मैंने अन्य वेबसाइट चेक की तो मुझे डंडा ₹199 में भी मिल रहा था लेकिन इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है कि 1 डंडे की कीमत कितनी है।

इन डंडों का प्रयोग अधिकतर सिक्योरिटी परपस के लिए किया जाता है
अमेजॉन पर इसके बारे में लिखी जानकारी के मुताबिक यह लाठी पुलिस, रक्षा मंत्रालय और अन्य पुलिस विभागों द्वारा अप्रूव होती है ।
3. डंडा पड़ने पर हड्डी नहीं टूटती

शायद आपने देखा हो जब पुलिस डंडे से मारती है तो यह नहीं देखती कि सामने वाले पर लाठी कहां पड़ेगी इसके पीछे का कारण है डंडे का मैट्रियल
जी हां इस लाठी से इंसान की हड्डी नहीं टूटती और ना ही सिर में चोट लगने का खतरा रहता है हालांकि इसकी मार से शरीर में खूब दर्द होता है
4. शरीर पर चोट का निशान पड़ता है

पुलिस की मार बुरी होती है और उस मार में सहयोग करता है प्लास्टिक का यह डंडा। इस डंडे की चोट काफी बुरी लगती है लेकिन आवाज नहीं आती
डंडा शरीर के जिस हिस्से में पड़ता है वहां से लाल और हरा (चोट से पढ़ने वाला निशान) हो जाता है डंडे से चोट लगने के बाद शरीर में लंबे समय तक दर्द बना रहता है
दोस्तों यह मैंने आपको पुलिस के डंडे की कुछ खास बातें बताई हैं तो लॉकडाउन के इस समय में आप नियमों का पालन करें ताकि पुलिस को सख्ती बरतने की जरूरत ना पड़े और आपको भी इस नए से देखने वाले डंडे को खाने का मौका ना मिले सेफ रहिए घर पर रहिए परिवार के साथ समय बताइए केंद्र सरकारें राज्य सरकारें और प्रशासन के द्वारा बनाए हुए नियमों का पालन कीजिए और कोरोना से लड़ने में अपनी सरकार और प्रशासन का सहयोग करें।
धन्यवाद
By Ashvi Verma
कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में इमरजेंसी के हालात पैदा कर दिए हैं भारत समेत दुनिया भर की सरकारें इस वायरस से जंग लड़ने के लिए मुमकिन कदम उठा रही हैं
कोरोना वायरस की वजह से कारोबार ठप पड़ गए हैं कई देशों में अंतरराष्ट्रीय यात्राएं रद्द कर दी गई हैं होटल रेस्टो या तो बंद कर दिए गए हैं या फिर लोग उनमें जाने से बच रहे हैं कई कंपनियां खासकर आईटी सेक्टर की कंपनियों ने लोगों को वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की सुविधा दे रही हैं.
जिन पर वायरस से पीड़ित होने का शक है उन्हें बाकी लोगों से अलग-थलग रखा जा रहा है
भारत में पहले से चल रही आर्थिक सुस्ती के दौर में कोरोना की दस्तक ने अर्थव्यवस्था को और मुश्किल में डाल दिया है इससे आने वाले वक्त में लोगों के आवाजाही,खाने-पीने, घूमने फिरने, सामाजिक मेलजोल, और कामकाज संबंधी व्यवहार और आदतों में भी बदलाव आने की संभावना है
साथ ही कंपनी के लिए और अर्थव्यवस्था के दूसरे सेक्टरों के लिए भी बहुत सारी चीजें बदलने वाली है और हो सकता है कि यह बदलाव बाद में स्थाई रूप ले ले.

क्या वर्क- फ्रॉम- होम से स्थाई व्यवस्था बनने वाली है..??
अभी तक इंफॉर्मेशन टेकनोलॉजी (आईटी) सेक्टर को छोड़कर बाकी सेक्टरों में वर्क फ्रॉम होम यानी घर पर काम करने की इजाजत मिलना तकरीबन नामुमकिन था कंपनियां दफ्तर से काम करने को तरजीह दे रही थी.
पहले जिन सेक्टरों में वर्क फ्रॉम होम नहीं था उनमें भी अब इसके लिए दरवाजे खोल रहे हैं मसलन सेल्स वाले रोल्स में भी वर्क फ्रॉम होम मिलने लगा है सेल के लोगों को कहा जा रहा है कि वह क्लाइंट के साथ वर्चुअल मीटिंग करें.
फ्यूचर में जरूरत पड़ी तो फ्लोक्सीबिलिटी होगी हालांकि मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में अभी यह मुश्किल है
कुछ कंपनियों के बारे में मैंने जानकारी पता कि वो बताती है लोगों के रिक्रूटमेंट के वक्त हम कोशिश कर रहे हैं उन्हें फार्म कोरियर कर दिया जाए यहां तक कि लैपटॉप वगैरह भी घर ही पहुंचाने के लिए विकल्प तलाशे जा रहे हैं अपनी फर्म में हम अगले हफ्ते तक 100 फीसदी वर्क फ्रॉम होम पर स्विच करने की कोशिश कर रहे हैं और एक बार अगर ऐसा हो जाता है तो वह हमेशा कायम रहता हैं.
हालांकि भारत में ऐसा होने में कुछ दिक्कतें भी हैं
मुझे नहीं लगता भारत इसके लिए तैयार है इंफ्रास्ट्रक्चर और कल्चर तौर पर हम अभी तैयार नहीं हैं हालांकि कुछ कंपनियां टूल्स और टेक्नोलॉजी के लिहाज से बेहतर स्थिति में है लेकिन भारत में ज्यादातर कंपनियां भी यही चाहेंगे कर्मचारी काम करने के लिए दफ्तर आएं
क्या लोगों में आने जाने की आदतों में बदलाव आएगा..??

कोरोना वायरस के फैलने के बाद से लोग भीड़ वाली जगहों पर जाने और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से बच रहे हैं खासतौर पर दिल्ली मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में लोगों को यह चिंता ज्यादा दिखती है
लोगों के बदलाव के संबंध में या फिर पॉलिसी लेवल पर जो भी बदलाव आए वह पूरी तरह से रिसर्च पर आधारित होनी चाहिए
भारत की आबादी ज्यादा है ऐसे में लोगों को फिर से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल शुरु करना होगा लेकिन रेलवे मेट्रो और बसों जैसे साधनों को चलाने वालों को साफ सफाई पर कहीं ज्यादा फोकस करना होगा

ट्रांसपोर्ट के संबंध में भी हमें सस्टेनेबल कंजमप्शन पैटर्न पर फोकस करना होगा हमारे कंजम्पशन पैटर्न का सीधा असर हमारे ट्रांसपोर्ट पर पड़ता है
हमारे ज्यादा खपत करने की आदत से हमारे अर्बन टिप्स और यात्रा करने की संख्या भी बढ़ जाती है फिलहाल पूरी दुनिया में ट्रेवल पर पाबंदी लगी हुई है इन पाबंदियों के बावजूद हमारा काम चल रहा है हमें कम लंबे ट्रिप्स कि आदत डालनी चाहिए लेकिन ऐसा तभी होगा जब इसके लिए रूल्स और रेगुलेशन लाए जाएंगे.
क्या ऑनलाइन होगी पढ़ाई..??
दुनिया भर में स्कूल और यूनिवर्सिटीज इस बात की कोशिश में है की पढ़ाई के तरीकों को बदला जाए और वर्चुअल क्लासेस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है
तमाम स्कूल कॉलेज भी इस तरह की संभावनाएं खंगाल रहे हैं ऐसे में फ्यूचर में छात्रों को क्लास रूम की बजाय वर्चुअल क्लासेस से जोड़ने की आदत डालनी पड़ सकती है.
धन्यवाद।।